- लोहारी राघो से भारतीय सेना में चुनी गई पहली महिला वायु सैनिक है वंदना बड़गुजर
- वंदना ने फिजिकल के लिए सुभाष चंद्रा एकेडमी से लिया था प्रशिक्षण
- 8 साल पूर्व हो गया था पिता कुलदीप का निधन
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| Lohari Ragho First Agniveer Vandana Badgujar लोहारी राघो। भारतीय वायुसेना में अग्निवीर चयनित होने पर वंदना को मिठाई खिलाती मां अनिता बड़गुजर। |
Vandana Badgujar First Women Agniveer of Lohari Ragho
संदीप कम्बोज
नारनौंद। सपनों की कोई सीमा नहीं होती, और मेहनत का कोई विकल्प नहीं। इसे सच कर दिखाया है जिला हांसी के उपमंडल नारनौंद के गाँव लोहारी राघो की 19 वर्षीय बेटी वंदना बड़गुजर ने। जिन्होंने भारतीय वायुसेना में अग्निवीर बनकर अपने परिवार, गाँव और पूरे जिले का नाम रोशन किया है। वंदना गाँव लोहारी राघो से भारतीय सेना में चुनी गई पहली महिला वायु सैनिक हैं। Indian Airforce Agniveer Vandana Badgujar from Lohari Ragho वंदना की सफलता के पीछे की कहानी सिर्फ पढ़ाई की नहीं, बल्कि एक मां के संघर्ष, समर्पण त्याग और अटूट मेहनत की है, जिसने समाज की हर बाधा को पार कर अपनी बेटी के सपनों को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। यह कहानी वंदना के आत्मविश्वास की मिसाल है। यह साबित करता है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है। आज वंदना न सिर्फ अपनी मां, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन गई है। उसकी सफलता उन सभी बेटियों के लिए रोशनी की किरण है, जो हालात से हार मानने की बजाय उन्हें चुनौती देने का जज्बा रखती हैं। वंदना की सफलता सिर्फ उसके परिवार व गाँव के लिए नहीं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी वजह से अपने सपनों से समझौता कर लेती हैं। वंदना की 30 दिसंबर को कर्नाटक के बेलगांव में जोईनिंग होनी है। वंदना बड़गुजर के वायु सेना में चयन पर पूरे गाँव में जश्न का माहौल है। पिछले दो दिन से घर में रिश्तेदारों, पड़ोसियों व गाँव वालों का तांता लग है। मिठाइयां बंट रही हैं लेकिन इस खुशी के पीछे की तपस्या और संघर्ष की कहानी हर किसी को भी भावुक देगी। कोई सोशल मीडिया पर बधाई संदेश भेज रहा है तो कोई उनके घर आकर मुंह मीठा करवाकर बधाई दे रहा है। हर कोई कह रहा था वंदना ने सच में कमाल कर दिया। ग्रामीणों की जुबान पर से एक ही बात सुनाई दे रही थी कि इस बच्ची ने दिखा दिया कि मेहनत और लगन से कुछ भी संभव है। इसका संघर्ष देखकर भगवान भी प्रसन्न होंगे। सर्वजन समाज पार्टी के अध्यक्ष नंद किशोर चावला, कांग्रेस नेता रत्तन बड़गुजर, हरियाणा कम्बोज महासभा के प्रदेश अध्यक्ष देसराज कम्बोज, समाजसेवी दीपक बड़गुजर, श्री रामा रामलीला क्लब के प्रधान गुलशन भ्याना, न्यू आदर्श सी. सै. स्कूल के डायरेक्टर नवीन यादव, सुभाष चंद्रा एकेडमी के कोच साधु सरोहा ने वंदना बड़गुजर के चयन पर हार्दिक बधाईयां देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।
8 साल पहले उठा पिता का साया, मां ने झाड़ू-पोचा कर पढ़ाया
वंदना की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है। Lohari Ragho News वर्ष 2017 में जब वह 11 साल की थी, तभी उसके पिता कुलदीप का निधन हो गया। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि मां अनिता देवी को बच्चों के पालन पोषण के लिए झाड़ू-पोछा करना पड़ा। एक मां के लिए यह कोई आसान फैसला नहीं था, लेकिन उनके लिए सबसे जरूरी था बच्चों की पढ़ाई। पति के जाने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अनिता पर आ गई। पांच बच्चे हैं, और उन्हें पढ़ाने के लिए उसने मजदूरी से लेकर हर तरह का काम किया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। फिलहाल वे पिछले 4 साल से गाँव के ही निजी स्कूल में बतौर स्वीपर कार्य कर रही हैं। पांच बहन भाईयों में सबसे बड़ी वंदना है जबकि छोटी बहन खुशी ग्याहरवीं कक्षा में पढ़ रही है वहीं कृष नौवीं, परि छठी तो कोफी प्राथमिक कक्षा में अध्य्यनरत हैं।
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| लोहारी राघो। सुभाष चंद्रा खेल एकेडमी में खिलाड़ियों के साथ ग्रुप तस्वीर में वंदना बड़गुजर। |
लोगों के तानों से मिलती थी मेहनत करने की ताकत
वंदना जानती थी कि मां कितनी तकलीफें सह रही हैं, इसलिए उसने ठान लिया कि वह पढ़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और एक दिन वायुसेना में जोईनिंग करके रहेगी। Lohari Ragho History वह दिन-रात पढ़ाई करती थी, घंटों किताबों में डूबी रहती। कई रातें उसने जागकर बिताई, बस एक ही सपना था मां के संघर्ष का सम्मान करना। वर्ष 2024 में 12वीं की परिक्षा में भी वंदना ने सार्इंस संकाय में 94 फीसद अंक हासिल कर विद्यालय में दूसरा स्थान हासिल कर गाँव का नाम रोशन किया था। वंदना कहती हैं कि मेरी मां मेरे लिए सब कुछ हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी हमें पढ़ाने में लगा दी। जब लोग कहते थे कि एक झाडृू-पोचे वाली की बेटी कुछ नहीं कर सकती, तो मुझे और ताकत मिलती थी मेहनत करने की। वंदना की आवाज में आत्मविश्वास झलकता है।
लोहारी राघो की पहली महिला वायुसैनिक बनी वंदना
Lohari Ragho's First Indian Airforce Agniveer Vandana Badgujar वंदना बड़गुजर के मुताबिक कोई भी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं है, बस जरुरत है बुलंंद हौंसले और कड़ी मेहनत की। 12वीं परीक्षा पास करने के उपरांत वर्ष 2025 में एक साल लगातार तक आईसीएस से कोचिंग ली और साथ ही गाँव लोहारी राघो स्थित सुभाष चंद्रा खेल एकेडमी से एक माह तक फिजिकल की ट्रेनिंग ली जो कि उसके बहुत काम आया। उसे अपनी कड़ी मेहनत पर पूरा विश्वास था और वह जानती थी कि उसका चयन भारतीय वायुसेना में हर हाल में होगा। वंंदना ने सुभाष चंद्रा एकेडी के कोच साधु सरोहा का भी आभार जताया है।
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| वंदना को मिठाई खिलाकर मुबारकबाद देते सुभाष चंद्रा खेल एकेडमी के कोच साधु सरोहा। |
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